12वी पास सहायक ने कबाड़ से बनाया इन्क्यूबेटर,अंडे से निकालता है चुजे

कृषि विज्ञान केंद्र कोरबा में दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी, 12वीं पास मनमोहन यादव ने कबाड़ से कमाल कर दिया है। उन्होंने बाजार में उपलब्‍ध इन्क्यूबेटर incubator की एक तिहाई से भी कम कीमत में ऐसी तकनीक विकसित की, जिसमें ससमय 21 दिन में चूजे निकल आते हैं।

मनमोहन के ऑटोमेटिक इन्क्यूबेटर के रख-रखाव पर भी खर्च ज्यादा नहीं है। शुरुआत में मनमोहन ने 30 अंडे के लिए घर में बेकार पड़े थर्मोकोल का प्रयोग किया। फिर कबाड़ फ्रिज की सहायता से 300 अंडों के लिए मशीन बनाई। अब तीन हजार तक के इन्क्यूबेटर तैयार कर रहे हैं। मशीन बनावाने गुजरात, मध्य प्रदेश, केरल और ओडिशा से हैचरी उत्पादक पहुंच रहे हैं।

कटघोरा विकासखंड के ग्राम लखनपुर के किसान सत्यनारायण यादव और उनकी पत्नी सरस्वती ने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन उनके पुत्र मनमोहन का हुनर दूसरे राज्यों तक पहुंचेगा। उनकी बनाई मशीन में कड़कनाथ, देसी मुर्गी, बटेर और बत्तख के अंडे रखे जाते हैं।

कड़कनाथ मुर्गी साल में 120 से 150 अंडे देती है, लेकिन उसे सेती नहीं है। इसलिए सभी अंडों से चूजे नहीं निकल पाते। इस जरूरत को पूरा करने के लिए मनमोहन ने जुगाड़ से इन्क्यूबेटर बनाया। अलग-अलग क्षमता की मशीनों के अंदर एक बार में 60 से लेकर 3,000 तक अंडे रखे जा सकते हैं। इनसे 21 से 23 दिन में चूजे बाहर आ रहे हैं।

पुरानी आलमारी में तीन हजार अंडों का इन्क्यूबेटर

मनमोहन को कृषि विज्ञान केंद्र कोरबा के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. आरके महोबिया ने मृदा परीक्षण में सहायता के लिए तीन साल पहले रखा था। फिर मशरूम लैब व पोल्ट्री फॉर्म की देखरेख का काम दिया। कोरिया से कड़कनाथ मुर्गे-मुर्गियां मंगवाए, तो उनके अंडे सेने के लिए इन्क्यूबेटर incubator की जरूरत पड़ी। बाजार में इसकी कीमत एक लाख रुपये थी। डॉ. महोबिया के प्रोत्साहन से मनमोहन ने एक पुरानी आलमारी को इन्क्यूबेटर का रूप दिया। इसकी लागत 30 हजार आई और इसमें एक बार में तीन हजार अंडे रखे जा सकते हैं।

इन उपकरणों का प्रयोग

अंडों को सही तापमान पर रखने के साथ दिन में तीन से चार बार हिलाना पड़ता है। यह काम मशीन खुद कर लेती है। मनमोहन ने अपने उपकरण को बनाने में एयर टाइट बॉक्स, तापमान नियंत्रण, आर्द्रता नियंत्रण, गर्मी पैदा करने के लिए हीटर, आर्द्रता फायर या आर्द्रता ट्यूब, अंडे को उलटाने-पलटाने के लिए एग टर्नर मोटर लगाए हैं। 18 दिन तक फ्रेम के जरिए अंडे को 45 डिग्री पर उलटाना-पलटाना पड़ता है, जिससे अंडों की बराबर सिकाई होती है।

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