आर्मीनिया और अज़रबैजान का युद्ध हुआ तेज, जानिए क्यों हो रहा हैं दोनों देशों के बीच यह युद्ध

armenia-azerbaijan war 2020

आर्मीनया और अज़रबैजान (armenia-azerbaijan war) के बीच चल रहा युद्ध रविवार को तेज हो गया. दोनों देशों के बीच नागोर्नो-काराबाख़ में लड़ाई बढ़ गई है और भारी गोलाबारी होने की ख़बरें मिल रही है.   

आर्मीनिया का कहना है कि अज़रबैजान ने नागोर्नो-काराबाख़ के प्रमुख शहर स्टेप्नाकियर्ट को निशाना बनाया है. एएफ़पी के मुताबिक़ वहां लगातार धमाके हो रहे थे और शहर के कई हिस्सों से काले धुएं के बादल उठते दिखे.

समाचार एजेंसी एएफ़पी के अनुसार अज़रबैजान के रक्षा मंत्रालय का कहना है कि आर्मीनिया की सेना ने उनके 3 लाख से ज़्यादा आबादी वाले शहर गांजा में धमाके किए हैं. वीडियो फुटेज में कई इमारतें नष्ट हुई दिख रही हैं. दोनों ही देश एक-दूसरे पर लड़ाई में आम लोगों को निशाना बनाने का आरोप लगा रहे हैं.

जानिए क्यों हो रहा हैं यह युद्ध

1920 के दशक में जब सोवियत संघ बना तो अभी के ये दोनों देश (आर्मीनिया और अज़रबैज़ान) उसका हिस्सा बन गए. लेकिन असल विवाद 1980 के दशक में शुरू हुआ जब सोवियत संघ का विघटन शुरू हुआ और नागोर्नो-काराबाख को सोवियत अधिकारियों ने अज़रबैजान के हाथों सौंप दिया.

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लेकिन नागोर्नो-काराबाख की संसद ने आधिकारिक तौर पर ख़ुद को आर्मीनिया का हिस्सा बनाने के लिए वोट किया. नागोर्नो-काराबाख की अधिकतर आबादी आर्मीनियाई है. दशकों तक नागोर्नो-काराबाख के लोग ये इलाक़ा आर्मीनिया को सौंपने की अपील करते रहे.

इस मुद्दे को लेकर यहां अलगाववादी आंदोलन शुरू हो गया और अज़रबैजान ने इसे ख़त्म करने की कोशिश की. इस आंदोलन को लगातार आर्मीनिया का समर्थन मिलता रहा.

नतीजा ये हुआ कि यहां जातीय संघर्ष होने लगे और सोवियत संघ से पूरी तरह आज़ाद होने के बाद एक तरह का युद्ध शुरू हो गया.

भौगोलिक और रणनीतिक तौर पर अहम होने के कारण भी ये विवाद जटिल हो गया है. सदियों से इलाक़े की मुसलमान और ईसाई ताकतें इन पर अपना प्रभुत्व स्थापित करना चाहती रही हैं.

इस इलाक़े से गैस और कच्चे तेल की पाइपलाइनें गुज़रती है इस कारण इस इलाक़े के स्थायित्व को लेकर चिंता जताई जा रही है.

कौन देश किसके साथ?

नागोर्नो-कराबाख़ में शांति बनाए रखने के लिए 1929 में फ्रांस, रूस और अमरीका की अध्यक्षता में ऑर्गेनाइज़ेशन फ़ॉर सिक्योरिटी एंड कोऑपरेशन इन यूरोप मिंस्क ग्रुप की मध्यस्थता में शांति वार्ता शुरू हुई थी.

हाल में मिंस्क ग्रुप की एक बैठक के बाद अमरीका, फ्रांस और रूस ने नागोर्नो काराबाख़ में जारी लड़ाई की आलोचना की है और कहा है कि ‘युद्ध जल्द ख़त्म होना चाहिए’.

हालाँकि अज़रबैजान के समर्थन में उतरे तुर्की ने युद्धविराम की मांग को रद्द कर दिया है. तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोआन ने कहा है कि युद्धविराम तभी संभव है जब आर्मीनिया अज़रबैजान के इलाक़े पर अपना कब्ज़ा ख़त्म करे.

वहीं रूस के आर्मीनिया के साथ गहरे संबंध हैं और मौजूदा तनाव के बीच उसने दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की पेशकश की है.

Courtsey: BBC

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