Harvard-MIT ने विदेशी छात्रों के मुद्दे पर ट्रंप प्रशासन के खिलाफ दर्ज कराया केस

Harvard-MIT on trump visa ban

Harvard-MIT: अमेरिका में विदेशी छात्रों को वापस उनके देश भेजने के ट्रंप प्रशासन के फैसले का विरोध तेज हो गया है. हावर्ड और एमआईटी ने इसके खिलाफ केस दर्ज कराया है.

हार्वर्ड के प्रेसिडेंट लॉरेंस एस बैकॉ ने यूनिवर्सिटी कम्युनिटी को दिए मैसेज में कहा, “ट्रम्प प्रशासन ने यह आदेश बिना किसी सूचना के दिया. ऐसा लगता है कि कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज पर क्लासरूम खोलने के लिए दबाव बनाया जा रहा है.

Harvard-MIT ने कहा कि ट्रंप प्रशासन को स्टूडेंट, इंस्ट्रक्टर और अन्य लोगों के स्वास्थ्य और सुरक्षा की कोई चिंता नहीं है.” उन्होंने इस फैसले को सियासी बताया.

जिन स्टूडेंट्स की सभी क्लासेस ऑनलाइन, उनके लिए फैसला
अमेरिका में रहने वाले विदेशी छात्रों पर ट्रम्प प्रशासन ने सोमवार को बड़ा फैसला लिया था. अमेरिकी सरकार ने कहा था कि जिन स्टूडेंट्स की सभी क्लासेस ऑनलाइन शिफ्ट हो गईं हैं, उन्हें देश लौटना होगा. डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन के इस फैसले से कुल 10 लाख स्टूडेंट्स पर असर पड़ेगा.

इनमें 2 लाख से ज्यादा भारतीय हैं. यहां सबसे ज्यादा स्टूडेंट्स चीन से आते हैं. इसके बाद भारतीयों का नंबर है. ग्रेजुएशन या पोस्ट ग्रेजुएशन वाले स्टूडेंट्स के लिए एफ-1 और एम-1 कैटेगरी के वीजा जारी किए जाते हैं.

इस मामले में सीनेटर बर्नी सैंडर्स ने कहा कि यह ट्रम्प प्रशासन की क्रूरता है. छात्रों को धमकाकर दो विकल्प दिए जा रहे हैं. जान जोखिम में डालकर क्लास आओ या फिर देश छोड़ दो. यह खतरनाक बात है.

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Source: Dainik Bhaskar

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