कोरोना से ठीक होने के बाद भी है खतरा,ऐसे करें देखभाल।

Corona : स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने रविवार को कोविड-19 से उबरने के बाद देखभाल (पोस्ट कोविड केयर) के लिए जारी किए गए नए दिशानिर्देशों में आयुर्वेद को अपनाने पर जोर दिया है, जिसमें च्यवनप्राश और आयुष दवाओं के इस्तेमाल की सलाह शामिल है।

दिशानिर्देशों में मंत्रालय ने पोस्ट कोविड Corona केयर में बेहतर स्वास्थ्य लाभ के लिए आयुष क्वाथ और समशमनी वटी जैसी प्रतिरक्षा-बढ़ाने वाली दवाओं के दैनिक उपयोग की सिफारिश की।


मंत्रालय द्वारा जारी सलाह में कहा गया है अन्य सुझावों के बीच योग, प्राणायाम और हर दिन की सैर को भी शामिल किया गया है। दिशानिर्देश के अनुसार, “क्लिनिकल प्रैक्टिस में च्यवनप्राश को रिकवरी के बाद की अवधि में प्रभावी माना जाता है।”


वहीं मंत्रालय ने लोगों को व्यक्तिगत स्तर पर चेहरे पर मास्क पहनने, हाथ धोने, सामाजिक दूरी बनाए रखने और अन्य सांस-संबंधी साफ सफाई जैसे प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करने की सलाह दी।
दिशानिर्देश में आगे कहा सुझाव दिए गए हैं, “यदि स्वास्थ्य ठीक हो तो नियमित रूप से घरेलू कामों में भी शामिल हों। वहीं पेशेवर काम को श्रेणीबद्ध तरीके से फिर से शुरू किया जाना चाहिए।”


घर में किसी के भी स्वास्थ्य की निगरानी करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए मंत्रालय ने लोगों को नियमित रूप से शरीर के तापमान और रक्तचाप की जांच करने की सलाह दी। साथ ही डॉक्टरों की सलाह पर पल्स ऑक्सीमीटर पर ऑक्सीजन रीडिंग लेने को भी कहा। उसके अनुसार, “तेज बुखार, सांस की तकलीफ, सीने में दर्द, कंफ्यूजन की स्थिति, और कमजोरी जैसे लक्षणों को शुरुआती चेतावनी के तौर पर देखें।”


वहीं मंत्रालय ने इससे उबर चुके लोगों से मित्रों और रिश्तेदारों के साथ अनुभवों को साझा करने के लिए सोशल मीडिया के माध्यम से जागरूकता फैलाने की सलाह दी। दिशानिर्देश के अनुसार, “सोशल मीडिया पर इन अनुभवों को साझा करने से सार्वजनिक जागरूकता फैलाने, मिथकों को दूर करने और कलंक को दूर करने में मदद मिलेगी।”


इसके अलावा यदि आवश्यक हो, तो मंत्रालय ने मानसिक स्वास्थ्य सहायता लेने की सलाह दी। दिशानिर्देश के अनुसार, “साथियों, सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और काउंसलर से साइको-सोशल सपोर्ट लें। यदि आवश्यक हो तो मानसिक स्वास्थ्य सहायता सेवा की मदद लें। रिकवरी और पुनर्वास प्रक्रिया (चिकित्सा, सामाजिक, व्यावसायिक, आजीविका) के लिए समुदाय-आधारित स्व-सहायता समूहों, नागरिक समाज संगठनों की मदद लें।”

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