Blog: भूखे सो रहे लोग और खरीदी केंद्र पर सड़ रहा अनाज

Blog भूखे सो रहे लोग

आज की तारीख में भी भूख से मरने वाले लोगों के देश में अनाज की बर्बादी एक क्रूर तमाशा है. तमाशा इसलिए कि इसी अनाज के लिए ग़रीब को लाइन में लगना पड़ता है, आधार कार्ड लिंक कराना पड़ता है, राशन कार्ड से लेकर खाद्यान्न पर्ची तक होने के बाद जब अंगूठे का निशान मशीन पकड़ती है तब जाके सरकारी अनाज मिलता है.

बहुत से लोग आज भी इसी अनाज के लिए तरस रहे हैं, जो सरकारी लापरवाही व अनदेखी के चलते सड़ रहा है. सहकारी समितियों के अधिकांश उपार्जन केंद्रों का हाल यह है कि बारिश के चलते गेहूं बोरियों में सड़ गया है और केंद्र में सड़ांध फैली हुई है.

खरीदी केंद्र पर सड़ गया अनाज

बोरियों को टटोलने से पता चलता है कि गेहूं फूलकर बंध चुका है अथवा गल चुका है. इसके बावजूद खराब गेहूं को न तो अलग किया जा रहा है और न ही सुखाया जा रहा है. सोसायटी संचालक, एसडीएम, तहसीलदार से लेकर कलेक्टर तक सबकी प्राथमिकता में है कि गेहूं किसी भी तरह से खरीदी केंद्रों से उठे.

चाहे सड़े, गले और उसकी वजह से जो सही है वह भी बरबाद हो जाये. प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि अभी हम नुकसान का आकलन नहीं कर रहे हैं और न ही किसी की जिम्मेदारी तय कर रहे हैं कि नुकसान किन वजहों से हुआ.

हमारी प्राथमिकता में है कि जल्द से जल्द अनाज खरीदी केंद्रों से लोडिंग होकर गोदाम पहुंचे. यह सच है कि तूफान और तेज बारिश के चलते यह नुकसान हुआ है. लेकिन उससे भी ज्यादा सच ये है कि तंत्र सिर्फ दौरे करता रहा और गेहूं सुरक्षित गोदामों तक पहुंचे इसके प्रति गंभीर ही नहीं था.

खरीदी केंद्र में भर गया पानी

खरीदी स्थल केंद्रों का निरीक्षण किया जाता है कि जगह कैसी है, वाहनों की आसान पहुंच हो, जल भराव वाला क्षेत्र न हो, केंद्र में प्रर्याप्त पन्नी तिरपाल की व्यवस्था हो. जबकि इसके उलट सहकारी केंद्रों के उपार्जन स्थलों में पानी भर गया जो बारिश के दो दिन बाद तक भरा रहा.

समय पर बोरियों के चट्टे तक नहीं लगाये गये. सतना जिले के रामपुर बाघेलान तहसील में बर्ती, बरदाडीह और बकिया जैसे उपार्जन केन्द्रों में बारिश होने के दो दिन बाद तक पानी भरा रहा. बारिश में बोरियां पानी में डूब गई.

कीचड़ से निकालकर बोरियों के चट्टे लगवाये गये. जिनमें आज भी कीचड़ लगा हुआ है. बकिया केंद्र तो बिल्कुल तालाब पर है. तालाब की मेड़ को उपार्जन स्थल बताया जाता है और बोरियां सूखे तालाब के अंदर वाले क्षेत्र और तालाब से लगे हुए मैदान में भी रखी जाती हैं.

जहां आज भी कीचड़ है और सड़े अनाज की दुर्गंध आ रही है।समितियां कह रही हैं कि समय पर परिवहन नहीं होने के चलते नुकसान हुआ है, हमारा अनाज रेडी टू ट्रांसपोर्ट की स्थिति में था. भले ही साफतौर पर अभी भी दिख रहा है कि हजारों क्विंटल अनाज सिंगल बोरियों में मैदान में बिछा हुआ था.

खुले मैदान में हो रही फसलों की खरीदी

जिसके चलते ज्यादा नुकसान हुआ. समय पर परिवहन न होना भी एक बड़ा कारण है नुकसान का. प्रशासनिक अधिकारी कह रहे हैं कि अभी किसी की जवाबदेही तय नहीं हुई है कि क्यों इतना ज्यादा नुकसान हुआ.

बहरहाल सरकार को अनाज व जनता से ज्यादा फिक्र चुनाव की तैयारियों को लेकर है. वैसे भी गोदामों में भी तो अनाज सड़ता है, घुनता है और चूहे खा जाते हैं. बचा हुआ राशन के नाम पर हितग्राहियों में बटता है. कहते हैं सहकारिता विभाग में बड़ा भ्रष्टाचार है. क्या हमारी सरकार को नहीं मालूम या सरकार भी.

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