राजनीतिक समीकरण / मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद की दौड़ में जीतू और शोभा सबसे आगे

जीतू पटवारी की नजर मंत्री से अधिक अध्यक्ष पद पर, शोभा ओझा ने भी संभाला मैदान

इंदौर. 17 दिसंबर को कमलनाथ मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले हैं। कमलनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद अब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का बदलना भी तय हो गया है। विधायक जीतू पटवारी और शोभा ओझा इस पद के प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं। दाेनों ने ही जोड़तोड़ शुरू कर दिया है।

राऊ से दूसरी बार विधायक बने जीतू पटवारी अभी मप्र कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष हैं। कमलनाथ के मंत्रिमंडल में पटवारी का शामिल होना तय माना जा रहा है, लेकिन उनसे जुड़े सूत्र बताते हैं कि पटवारी की रुचि मंत्री बनने से अधिक मप्र कांग्रेस का अध्यक्ष बनने में है।

शोभा ओझा

महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष रहीं शोभा ओझा भी इस दौड़ में शामिल हैं। संगठन पर शोभा की अच्छी पकड़ है और मालवा-निमाड से भी वह बेहतर परिचित है। इस विधानसभा चुनाव में ओझा ने प्रवक्ता के तौर पर कार्य करके पार्टी के नेताओं को खासा प्रभावित कियाह है।

सूत्रों का कहना है कि कमलनाथ ऐसे व्यक्ति को अध्यक्ष पद सौपना चाहते हैं जो सरकार की मदद करें, ना की उस पर हावी होने का प्रयास करें। ऐसे में नाथ की पहली पसंद सज्जनसिंह वर्मा है, लेकिन दिग्विजयसिंह को सज्जन वर्मा पसंद नहीं करते और संगठन दिग्विजय काे नाराज करना नहीं चाहेगा। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी से जीतू पटवारी और शोभा ओझा दोनों के संबंध बेहतर है, जिसका लाभ दोनों में से किसी एक को मिल सकता है।                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                            पुराने दौड़ से लगभग बाहर
अजय सिंह, अरुण यादव और कांतिलाल भूरिया के नाम चुनाव परिणामों की वजह से अध्यक्ष पद की दौड़ से बाहर बताए जा रहे है। यादव मप्र अध्यक्ष रह चुके हैं, लेकिन उनके कार्यकाल में पार्टी के खाते में हार आई थी और इस विधानसभा चुनाव में यादव खुद हार गए है। वहीं, अजय सिंह और कांतिलाल भूरिया के खाते में भी हार है। महिला कोटे से मीनाक्षी नटराजन भी अध्यक्ष पद की दावेदार मानी जा सकती है, लेकिन लोकसभा चुनाव हारने के बाद से वे लूपलाइन में है।

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