Indore कैसे बना कोरोना वायरस का केंद्र

Indore Corona epicenter

कोरोना वायरस शायद अब तक के मानव इतिहास की सबसे भयावक बीमारी होगी. अंतरिक्ष तक पहुंच चुके मावन ने कभी नहीं सोचा होगा की एक बीमारी पूरे विश्व को ऐसे लॉकडाउन कर देगी. 21वीं सदी में इतने विकास के बावजूद भी हम कोविड-19 वायरस का इलाज नहीं नहीं ढू़ंढ पाए.

विश्व स्वास्थ संगठन जिससे पूरी दुनिया को उम्मीद थी कि वह इस वैश्विक महामारी में सबकी मदद करेगा, लेकिन वह भी इस बीमारी के आगे बेबस नजर आया. क्या चीन, अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, रूस, जापान सभी संपन्न देश कुछ भी नहीं कर पाए.

भारत जिसे उम्मीद नहीं थी कि इस बीमारी का असर इतना होगा कि देश के दो महीनों के लिए घरों के अंदर रहने के लिए कहा जाएगा. शायद किसी ने भी नहीं सोचा होगा कि यह वायरस हमें अपने घरों में रहने के लिए मजबूर कर देगा.

दिसंबर महीने में जब चीन में इस वायरस के कारण लोगों की मौतें होना शुरू हुई तब पूरे विश्व का ध्यान इस मुद्दे पर गया, उससे पहले तो किसी को भी इस के बारे में दिलचस्पी नहीं थी. जब हमने सुना की चीन ने 10 दिनों में 1000 बेड वाला अस्पताल बना डाला. इस घटना के बाद सभी को लगा मामला कुछ गंभीर है, जिसके बाद भारत सरकार ने विदेशों से आने वाले लोगों की जांच एयरपोर्ट पर करना शुरू कर दिया.

Checking at Airport

केंद्र सरकार तो सजग हो गई थी, लेकिन इस लड़ाई में सभी प्रदेशों का सहयोग चाहिए. लेकिन क्या करें मध्यप्रदेश में जनवरी और फरवरी के बीच सरकार अपनी सरकार बचाने में इतनी व्यस्त थीं कि उसे पता ही नहीं चल पाया कि उसके बिजनेस राजधारी (इंदौर) में इस वायरस ने अपनी दस्तक दे दी हैं. वैसे भी इंदौर तो खाने-पीने और दिल-खुश लोगों का शहर हैं वहां रह रहे लोगों को क्या पता एक वायरस चीन से चल कर देश की धड़कन और उस धड़कन की धड़कन (इंदौर) में यह वायरस आ जाएगा.

इंदौर में वायरस के पहले मरीज की शुरूआत इंडिया टूडे की रिपोर्ट के अनुसार 25 मार्च को हुई थी, जब पहली पॉजिटिव मरीज की खबर आई. इसके बाद तो संख्या हर दिन बढ़ती ही गई और गुरूवार तक जिले में 1700 से ज्यादा केस आ चुके हैं.

स्वच्छता के लिए पूरे देश में अपनी पहचान बना चुका इंदौर अब कोरोना वायरस का हॉटस्पाट है. जिसके कारण शहर रेड जोन में है. मरीजों की बढ़ती संख्या ने लोगों को डरा दिया है, हांलाकि उम्मीद की किरण बुधवार को दिखी जब 556 लोगों का सैंपल टेस्ट किया गया जिसमें 538 लोगों का निगेटिव रिपोर्ट आई.

Indore Rajwada

भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार “इंदौर के कलेक्टर मनीष सिंह ने कहा शहर काफी हद तक ठीक हो गया है, इसका मुख्य कारण लॉकडाउन हैं. अभी 75 फीसदी अस्पताल खाली हो गए है और करीब 500 से ज्यादा मरीज ठीक होकर अपने घर जा चुके है.”

इंदौर के कोरोना का केंद्र बनने के पीछे कई कारण है. पहला, प्रदेश की आर्थिक राजधानी होने के कारण यहां बहुत से लोगों का विदेश जाना और आना लगा रहता है, जिसके कारण ही इस वायरस का फैलाव शुरू हुआ. दूसरा कारण है इंदौर का विकास. विकास से मतलब है कि पूरे प्रदेश में इंदौर से बेहतर अस्पताल नहीं है, जिसके कारण से आस-पास के जिलों के मरीज भी इंदौर रेफर हो कर आने लगे. इस कारण से भी कोरोना के मरीजों की सख्या में बढ़ोतरी हुई.

लॉकडाउन से पहले इंदौर में मरीजों के ठीक होने का दर 6.50 था जो तीसरे लॉकडाउन में बढ़कर 37.35 हो गया है. इन आंकड़ो से साफ है कि शहर में कोरोना की स्थिति ठीक हो रही है. वहीं शहर में अभी तक किसो को आने की इजाजत नहीं थी, लेकिन गृह मंत्रालय की नोटिस के बाद शहर में भी लोगों की आवाजाही शुरू हो गई है.

अंत में सिर्फ इतना ही कि अपनी खास पहचान रखने वाला शहर इंदौर जल्द हीं रेड जोन से निकल जाएगा. रोड़ पर पहले की तरह ही लोग ठेलों पर पोहा और जलेबी का स्वाद ले पाएंगे.

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