इंदौर निगम का जलसंकट दूर करने का नया प्रयास

इंदौर, शहर को स्वच्छता में नंबर बनाने वाला नगर निगम अब जलसंकट दूर करने के लिए अभियान शुरू करेगा। भीषण गर्मी में शहर की प्यासी धरती को हमेशा तर रखने के लिए निगम जल्द ही ज्यादा से ज्यादा घरों में वाटर हार्वेस्टिंग का काम बड़े पैमाने पर शुरू करेगा, ताकि बारिश का पानी जमीन में उतारा जा सके। इसमें निगम रहवासियों की मदद करेगा। इसके लिए एनजीओ की टीमें बनाई जा रही हैं जो सबसे कम पानी वाले क्षेत्रों को चिन्हित करेंगी।

पिछले दिनों निगमायुक्त आशीष सिंह ने बायपास से लगे अनुराधा नगर में लोगों की जागरूकता से घर-घर में लगे वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का निरीक्षण किया था। अकसर मार्च से मई तक ‘सूखाग्रस्त’ रहने वाली इस कॉलोनी में सिस्टम लगने से इस बार परेशानी कुछ कम हुई है। यहां लोगों ने स्वप्रेरणा से ‘जल बचाओ’ मुहिम शुरू की है। ऐसे में निगम इसे पूरे शहर में लागू करने की योजना बना रहा है। इसके लिए वह गांव में जलग्रहण प्रबंधन के क्षेत्र में वर्षों से कार्य कर रहे नागरथ चेरिटेबल ट्रस्ट की मदद ले रहा है। इसमें ज्यादा से ज्यादा घरों में वाटर हार्वेस्टिंग कराया जाएगा। इंदौर में करीब 3 लाख मकान हैं। इनमें छत पर बारिश का पानी सहेजने के लिए जोर-शोर से रणनीति तैयार हो रही है।

जनसहयोग से दूर होगी परेशानी

जिस तरह से शहर को कचरामुक्त करने के लिए निगम के साथ शहरवासियों ने भी सहयोग किया, वैसे ही पानी बचाने के लिए भी उनसे अपील की जा रही है। वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की लागत का कुछ अंश निगम वहन करेगा, जबकि कुछ भाग मकान मालिक। सामान्य तौर पर इसकी लागत 7 से 8 हजार रुपए आती है। अधिक सिस्टम लगाने पर लागत कम करने पर भी विचार किया जा रहा है।

जलस्तर का होगा सर्वे

वाटर हार्वेस्टिंग का काम शुरू करने के पहले शहर में जलस्तर का सर्वे किया जाएगा। जिन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा जलसंकट है, वहां पहले काम शुरू जाएगा। इसके लिए निगम ने करीब डेढ़ सौ लोगों की टीम गठित करने के लिए कहा है। यह काम बारिश के पहले शुरू किया जाएगा।

टैंकर पर रोज खर्च होते हैं लाखों रुपए

शहर में जलग्रहण प्रबंधन का प्रयोग सफल हुआ तो निगम पर टैंकर पर रोजाना किए जाने वाले लाखों रुपए के खर्च का भार कम होगा। जलसंकट के कारण निगम के करीब 450 छोटे-बड़े टैंकर शहर में चलते हैं। इनमें सिर्फ 80-90 टैंकर निगम के, जबकि शेष किराए के हैं। एक टैंकर पर प्रतिदिन 4-5 हजार रुपए खर्च होता है। गर्मी के चार महीने में निगम को करोड़ों रुपए खर्च करना पड़ते हैं। योजना के मुताबिक लोगों में जागरूकता आती है तो टैंकर पर होने वाला खर्च हार्वेस्टिंग में वहन किया जा सकता है। एनजीओ द्वारा जलसंकट पर डॉक्युमेंट्री फिल्म तैयार की गई है। यह फिल्म प्रत्येक कॉलोनी में दिखाई जाएगी, जिससे रहवासी वाटर हार्वेस्टिंग के प्रति जागरूक होंगे।

बड़े पैमाने पर योजना तैयार

जल बचाओ को लेकर बड़े पैमाने पर योजना तैयार हो रही है। बारिश के पहले जलग्रहण प्रबंधन कार्यक्रम शुरू करने की योजना है। कोशिश यह है कि स्वच्छता की तरह यह अभियान भी उतने ही जोश और उत्साह के साथ चले। – आशीष सिंह, निगमायुक्त, नगर निगम

नईदुनिया

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