Madhya Pradesh: आखिर क्यों 100% आरक्षण का ऐलान शिवराज सरकार ने किया

Madhya Pradesh: मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरियों और सेवाओं में सिर्फ राज्य के निवासी युवाओं को अवसर देने का शिवराज सरकार के ऐलान किया है। इस ऐलान के कई मायने भी निकाले जा रहे हैं

क्या है शिवराज सरकार का ऐलान

सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा, ‘मेरे प्रिय प्रदेशवासियों, अपने भांजे-भांजियों के हित को ध्यान में रखते हुए हमने निर्णय लिया है कि मध्यप्रदेश में शासकीय नौकरियां अब सिर्फ मध्यप्रदेश के बच्चों को ही दी जाएंगी. इसके लिए आवश्यक कानूनी प्रावधान किया जा रहा है. प्रदेश के संसाधनों पर प्रदेश के बच्चों का अधिकार है.’

जानकर बताते है यह एक तरह का चुनावी जुमला की तरह ही है, आप को बता दे मध्य प्रदेश में 27 सीटों पर उपचुनाव होना है राज्य में चुनावी वादो का बयार लगना शुरू हो गया है दोनों ही पार्टियां अपने अपने वादों के साथ चुनावी मैदान में कूद गई है।

सरकार के ऐलान पर कानून के जानकारों ने आपत्ति दर्ज कराई।

शिवराज सरकार के ऐलान पर कानून के जानकारों ने आपत्ति दर्ज कराई है. इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ क्रिमिनल जस्टिस के स्थाई वकील दीपक आनन्द मसीह का कहना है कि राज्य सरकार के अधिकार में ये करना है ही नहीं.

वकील दीपक ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के डॉ. प्रदीप जैन सहित कई याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट के फैसलों की श्रृंखला है, जिनमें कोर्ट ने राज्य सरकारों के ऐसे प्रस्तावों को सिरे से खारिज कर दिया है. मसीह के मुताबिक, राज्य सरकारें सरकारी नौकरियों के लिए तय शर्तों और मानदंडों में डोमिसाइल यानि स्थाई निवासी को प्राथमिकता का कोई मानक बना सकते हैं, लेकिन होल्सम यानी शत प्रतिशत इसके आधार पर प्रावधान तय नहीं कर सकते.

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