JNU पर बोलने वाले सागर विश्वविद्यालय के कुलपति अपने विश्वविद्यालय की रैंकिंग पर क्यों नहीं बोलते

JNU Sagar University

सागर विश्वविद्यालय के कुलपति के नेतृत्व में JNU में हुई हिंसा के लिए वामपंथी विचारधारा को मानने वाले छात्रों को दोषी ठहराते हुए कई शिक्षाविदों ने प्रधानमंत्री से कार्यवाही की मांग करते हुए पत्र लिखा था. कुलपति ने इंटरव्यू में कहा था कि वामपंथी छात्रों ने शिक्षा का माहौल खराब कर दिया है. JNU जैसे संस्थानों में शिक्षा का माहौल ही नहीं रहा.

सागर विश्वविद्यालय (Sagar University) के माननीय कुलपति विश्वविद्यालय में लगातार संघ के विचारकों और संघी विचारधारा के पोषकों के कार्यक्रम कराते रहे हैं. दिसंबर 2019 में शंकराचार्य के नाम पर तीन से चार दिन का सेमीनार रखा गया, जिसमें देशभर से संघ के पदाधिकारियों, पंडे-पुरोहितों की भरमार रही. बेहद खर्चीले कार्यक्रम में एक से एक विद्वतजनों ने उद्बोधन दिया.

इसी दौरान अखबारों में सेवाभावी छवि के साथ कुलपति महोदय की एक फोटो सहित ख़बर लगी कि कर्नाटक से आये बटुक (वेदपाठी ब्राह्मण छात्र) ब्राम्हण के हाथ का बना भोजन गृहण करते हैं, इसलिए मैं पवित्रता के साथ अपने हाथों से इनके लिए भोजन तैयार कर रहा हूं. इस बात को लेकर विवि के छात्रों, प्राध्यापकों व शहर में भी चर्चा रही कि यह जातिवाद को पोषण देने वाली सेवा थी.

पुराने निर्माण को ध्वस्त करते हुए नये निर्माण में जुटे राष्ट्र भक्त कुलपति खुद की उपलब्धियों का बखान भी करते रहते हैं. दुर्भाग्य की बात यह है कि कुलपति जी के अथक परिश्रम के बावजूद मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा जारी (NIRF) रैंकिंग में डाॅ हरी सिंह गौर केन्द्रीय विश्वविद्यालय सागर 166वें स्थान पर है.

BBC India पर छपी खबर के मुताबिक, जिस विश्वविद्यालय के बारे में कुलपति महोदय ने कहा था. वह एमएचआरडी द्वारा जारी (NIRF) रैंकिंग में टॉप 10 में शामिल है. इस रैंकिग में पहला स्थान इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ साइंस, बेंगलुरु का है. जेएनयू दूसरे और बीएचयू तीसरे नंबर पर है. वहीं चौथे रैंकिंग पर अमृत विश्व विद्यापीठम कोयम्बटूर, पाँचवे पर जाधवपुर यूनिवर्सिटी कोलकाता, छठवें पर हैदराबाद यूनिवर्सिटी है.

गौरतलब हैं कि जामिया में नागरिकता संशोधन क़ानून के विरोध में जमकर प्रदर्शन हुए थे. इसी तरह जेएनयू में भी होस्टल फ़ीस बढ़ाने के विरोध में छात्रों ने दो महीने से ज्यादा समय तक प्रदर्शन किया था.

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