ब्लैक फंगस इन्फेक्शन से वाराणसी से हुई पहली मौत, एम्स डायरेक्टर गुलेरिया ने कहीं यह बात

ब्लैक फंगस इन्फेक्शन को लेकर एम्स डायरेक्टर रणदीप गुलेरिया ने कहा, यह उन लोगों में दिखता था जिनका शुगर बहुत ज्यादा हो, डायबिटीज अनकंट्रोल है, इम्युनिटी बहुत कम है या कैंसर के ऐसे पेशंट्स हैं जो कीमोथैरपी पर हैं.

लेकिन आज इसके ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं. इसके साथ ही डॉ गुलेरिया ने कहा कि स्टेरॉयड्स का ज्यादा इस्तेमाल करने से ब्लैक फंगल के मामले आ रहे हैं.

डॉ गुलेरिया ने कहा कि आम लोगों में आम तौर पर फंगल इंफेक्शन नहीं पाया जाता था लेकिन कोरोना की वजह से इसके केस काफी आ रहे हैं. एम्स में ही फंगल इन्फेक्शन के 23 मामले हैं.

इनमें से 20 अभी भी कोरोना पॉजिटिव हैं और 3 कोरोना नेगेटिव हैं. कई राज्य ऐसे हैं जहां फंगल इन्फेक्शन से 400-500 केस हैं.

उन्होंने बताया कि फंगल इंफेक्शन आंख, नाक, गला, फेफड़े पर हो सकता है. इससे आंखों की रोशनी, नाक से ब्लड और अगर फेफड़े में पहुंच गया तो सीने में दर्द फीवर जैसे लक्षण दिखाई देते हैं.

उत्तर प्रदेश में कोरोना के मामले

वाराणसी में कोरोना के कहर के बीच ब्लैक फंगस के मामले दिन प्रतिदिन बढ़ते जा रहे है. ब्लैक फंगस से ग्रसित कोरोना संक्रमित जिस महिला का चार दिन पहले बीएचयू में ऑपरेशन हुआ था.

उसकी शनिवार को मौत हो गई. बिहार निवासी 50 वर्षीय महिला का बीएचयू के कोविड आईसीयू में उसका इलाज चल रहा था. यह वाराणसी  में ब्लैक फंगस से होने वाली पहली मौत है.

इसके अलावा शनिवार को छह और मरीजो ने परामर्श लिया, जिन्हें इलाज के लिए बीएचयू ईएनटी डिपार्टमेंट बुलाया गया है. बीएचयू ईएनटी डिपार्टमेंट में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. एसके अग्रवाल ने बताया कि ऑपरेशन के बाद महिला का इलाज कोविड आईसीयू में चल रहा था. उसका ऑक्सीजन सेचुरेशन भी 80 था.

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