बढ़ती बेरोजगारी के बीच सरकार ने कंपनियों से कर्मचारियों को निकालने की दी इजाजत

बेरोजगारी

देश में बढ़ते कोरोना वायरस के मरीज और बेरोजगारी ने सभी रिकार्ड तोड़ दिए है. इस बीच संसद का मानूसन सत्र भी चल रहा हैं लेकिन बिना विपक्ष के. इसी संसद सत्र में बुधवार को तीन प्रमुख श्रम सुधार विधेयकों को मंजूरी दे दी गई है. इन विधेयकों के पास हो जाने से अब कंपनियां जब चाहें कर्मचारियों को काम से निकाल सकती है.

इस विधेयक के पास हो जाने के बाद कंपनियों को बंद करने की बाधाएं खत्म हो जाएंगी और अधिकतम 300 कर्मचारियों वाली कंपनियों को सरकार की इजाजत के बिना कर्मचारियों को निकालने की अनुमति होगी.

राज्यसभा ने ध्वनि मत से औद्योगिक संबंध, सामाजिक सुरक्षा और व्यावसायिक सुरक्षा पर शेष तीन श्रम संहिताओं को पारित किया. इस दौरान 8 सांसदों के निष्कासन के विरोध में कांग्रेस, वामपंथी और कुछ अन्य विपक्षी दलों ने राज्यसभा की कार्रवाई का बहिष्कार किया.

बता दें कि इन तीनों संहिताओं को लोकसभा ने मंगलवार को पारित किया था और अब इन्हें राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा. श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने तीनों श्रम सुधार विधेयकों पर हुई बहस का जवाब देते हुए कहा, ”श्रम सुधारों का मकसद बदले हुए कारोबारी माहौल के अनुकूल पारदर्शी प्रणाली तैयार करना है.’

गंगवार ने कहा कि रोजगार सृजन के लिए यह उचित नहीं है कि इस सीमा को 100 कर्मचारियों तक बनाए रखा जाए, क्योंकि इससे नियोक्ता अधिक कर्मचारियों की भर्ती से कतराने लगते हैं और वे जानबूझकर अपने कर्मचारियों की संख्या को कम स्तर पर बनाए रखते हैं.

उन्होंने सदन को बताया कि इस सीमा को बढ़ाने से रोजगार बढ़ेगा और नियोक्ताओं को नौकरी देने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकेगा. उन्होंने कहा कि ये विधेयक कर्मचारियों के हितों की रक्षा करेंगे और भविष्य निधि संगठन और कर्मचारी राज्य निगम के दायरे में विस्तार करके श्रमिकों को सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा प्रदान करेंगे.

चर्चा की शुरूआत करते हुए भाजपा के विवेक ठाकुर ने कहा कि स्थायी संसदीय समिति ने इन तीनों विधेयकों पर विस्तृत चर्चा की. बाद में श्रम मंत्रालय ने भी विभिन्न पक्षों से बातचीत की.

उन्होंने कहा कि एक बड़ा तबका इन विधेयकों के दायरे में आएगा. उद्योगों में श्रम की अहम भूमिका का जिक्र करते हुए उन्होंने इसे प्रगतिशील श्रम सुधार बताया..

ठाकुर ने कहा कि श्रमिक देश की आत्मा हैं और उनके योगदान के बिना उद्योग की कल्पना नहीं की जा सकती. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार श्रमिकों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए ये विधेयक लाए गए हैं. इसके प्रावधानों से कारोबार करने में आसानी होगी.

जद (यू) के आरसीपी सिंह ने तीनों विधेयकों का समर्थन करते हुए कहा कि यह ऐतिहासिक कदम है जिसमें 25 कानूनों को एक संहिता में समाहित किया गया है. उन्होंने कहा कि पहले सबकी अलग अलग परिभाषा, अलग प्राधिकार आदि होते थे लेकिन अब सबको समाहित किया जाएगा जिससे अच्छा प्रभाव पड़ेगा.

Also Read: Rajyasabha सांसदों के समर्थन में अब Loksabha में भी विपक्षी सांसदों का बायकॉट

Source: Live Hindustan

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *