लोकसभा चुनाव : नागरिकता बिल मास्टर स्ट्रोक या आत्मघाती कदम ?

नई दिल्ली। फरवरी महीने की शुरुआत संसद में बजट पेश करते हुए हुई। 1 तारीख को पेश हुए इस बजट का निशाना तो दो महीने बाद होने वाले लोकसभा चुनावों पर था। अब सवाल यही है की किसानों की चिंता जो अभी कांग्रेस पार्टी ही ज्यादा करती हुई दिखाई देती थी, (एक तरह से किसान लोन माफी की ठेकेदारी जो कांग्रेस ने ले रखी थी) अब बजट के बाद लग रहा है की बीजेपी भी किसानों की चिंता करती है (भले ही लोनमाफी ना करके) ?

आज महीने की दुसरी तारीख है इसलिए इसकी शुरुआत मैंने बजट के सारांश से की है, लेकिन मैं अपने हेडलाइन से ज्यादा दुर नही जाना चाहता हुं इसलिए बात वही करते है जो हेडलाइन लिख कर मैं आप को अपने इस पेज पर लाया हुं।

वैसे तो बीजेपी ने कई चुनावीं वादे पुरे नही किए जो उन्होंने 2014 के चुनावों के समय वादा किया था। लेकिन पूर्वोतर राज्यों में मोदीजी द्रारा एक वादे को पुरा कर देने से वहां विरोध बढ गया है. पूर्वोतर राज्य जिन्हें अंग्रेजी में (Seven Sisters) भी कहा जाता है. वह राज्य है ( असम, मणिपुर, मिजोरम, मेघालय, नागालैङ, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश, बाद में सिक्किम को भी इस समूह में शामिल किया गया)।

सरकार ने लोकसभा में नागरिकता संसोधन बिल- 2016 को पास कर दिया है, अब इस बिल को राज्यसभा में पास होना है जिसके बाद राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद प्रभावी हो जाएगा। हालांकि इसके पास होनें में अभी समय है और 2019 चुनावों से पहले यह पास हो पाएगा या नहीं इसके बारे में हम नीचे बात करेगें।

बीजेपी सरकार ने यह बिल पास कर अपनी स्थिति पूर्वोतर में और मजबूत करने की कोशिश की है लेकिन यह तो लोकसभा चुनावों के बाद ही पता चल पाएगा की मजबूत होती है या खत्म हो जाती है, लेकिन ओपिनियन पोलों की बात करें तो बीजेपी के गठबंधन को 25 सीटों में से 17 सीटें मिलने का अनुमान है.।

आइए जानते है किस चैनल ने बीजेपी गठबंधन को कितनी सीटें दी है:

Party VDP Associates India TV Republic TV
Seats Votes Seats Seats
NDA 18 37 18 17
UPA 3 22 1 5
Other 4 34 6 3
CS* 7
CS: Can’t say means No opinion

इन ओपिनियन पोल के रिजल्ट पर आप ध्यान देगें तो पाएगें की इस बार पूर्वोतर राज्यों में मोदी मैजिक चल गया है। खैर यह तो चुनाव परिणाम के बाद पता चल ही जाएगा की कितना मैजिक किसका चला। लेकिन लगता नही है की नागरिकता बिल का जितना विरोध राज्यों में हो रहा है उसका परिणाम लोकसभा चुनावों पर दिखे।

क्या है नागरिकता बिल ?

नागरिकता संसोधन बिल 1966 के नागरिकता बिल में संसोधन के लिए लाया गया है, इस बिल के जरिए केंद्र सरकार अफगानिस्तान, बांग्लादेश, पाकिस्तान से हिंदुओं, सिखों, बौद्धों, जैन, पारसियों और ईसाइयों को बिना वैध दस्तावेज के भारतीय नागरिकता देने का प्रस्ताव रखा है। इसके लिए उनके निवास काल को 11वर्ष से घटाकर छह वर्ष कर दिया गया है। यानी अब ये शरणार्थी 6 साल बाद ही भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते हैं। इस बिल के तहत सरकार अवैध प्रवासियों की परिभाषा बदलने के प्रयास में है।

जबकि 1955 नागरिकता अधिनियम के अनुसार, बिना किसी प्रमाणित पासपोर्ट, वैध दस्तावेज के बिना या फिर वीजा परमिट से ज्यादा दिन तक भारत में रहने वाले लोगों को अवैध प्रवासी माना जाएगा। 

दुसरा विवाद यह भी यह है सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो रहा एनआरसी (नैशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस ) इस कानून के पास होने के बाद निष्क्रिय हो जाएगा क्यों कि इस कानून के तहत शरणार्थी 6 साल बाद ही भारतीय नागरिक बन सकता है जबकि एनआरसी के माध्यम से सरकार यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि जितने भी अवैध विदेशी नागरिक है उन्हें असम से खदेड़ दिया जाए. लेकिन बिल और एनआरसी में काफी विरोधाभास है।

राजनीतिक फायदा – दरअसल इस पुरी कवायद के पीछे बीजेपी धार्मिक तौर पर इन राज्यों में अपने वोटर्स की संख्या बढ़ाना चाहती है, जिसके बल पर वह इन राज्यों में अपनी पार्टी का विस्तार कर सके। लेकिन उसके इस मकसद को उसके ही सहयोगियों द्वारा झटका लगा है। एनडीए के सहयोगी बीजेपी का साथ इस बिल पर नही कर रहे है।

आखिर में क्यों यह बिल राज्यसभा में पास नही हो पाएगा

इसके पीछे की गणित यह है की कांग्रेस, टीएमसी, सीपीएम, सीपीआई, समेत पुरा यूपीए ही इस बिल का विरोध कर रहा है वही बीजेपी की सहयोगी जेडीयू, शिवसेना, और एजेपी पार्टी भी इस बिल का विरोध कर रही है. इससे साफ है की यह बिल इस सत्र में पास नही हो पाएगा।

Written by- Ashwine kumar singh

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *