सर्जिकल स्ट्राइक डे मनाने को लेकर यूजीसी का नोटिस, तो कश्मीर में आतंकियों के डर से एसपीओ दे रहे इस्तीफे

नई दिल्ली। सरकार के निर्देश पर यूजीसी ने देशभर के कॉलेजों को नोटिस जारी कर 29 सितंबर को सर्जिकल स्ट्राइक डे मनाने को कहा है। यूजीसी के इस सर्कुलर पर कांग्रेस समेत सभी विपक्षी पार्टियों में सरकार पर हमला बोला। इस बीच सरकार ने कहा की सर्जिकल स्ट्राइक मानना अनिवार्य नहीं है।

वहीं कश्मीर में 3 पुलिस जवानों की बुजदिल आतंकियों ने हत्या कर दी, और एक वीडियो जारी कर हत्या की जिम्मेदारी लेते हुए कहा कि एसपीओ (स्पेशल पुलिस अधिकारी) अपनी नौकरी छोड़ दे नहीं तो उनकी हत्या कर देंगे। जिसके बाद मीडिया रिपोर्ट्स की माने को करीब 6 से ज्यादा एसपीओ ने अपनी नौकरी छोड़ दी। हालाकि नौकरी छोड़ ने कि खबर मीडिया में दिखाने के बाद गृह मंत्रालय ने अपनी सफाई देते हुए कहा कि, यह रिपोर्ट्स गलत है, और जम्मू कश्मीर पुलिस ने इस्तीफो की खबरों से इंकार किया है।

लेकिन सवाल है कि एसपीओ अधिकारियों के को वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहे है , वह सच है या गलत। अगर सच में भी अधिकारी आतंकियों के डर इस्तीफे दे रहे है तो सरकार को सबसे पहले उनके इस डर को खत्म करना चाहिए, तब ही सर्जिकल स्ट्राइक डे मनाना चाहिए।

जम्मू कश्मीर में सरकार चलाने वाली केंद्र सरकार को बताना चाहिए की कश्मीर में आर्मी ऑपरेशन के बाद क्या वहां के लोगों में अतांकियो को डर कम हुआ है या बढ गया है? अगर जम्मू कश्मीर में सरकार चलाते हुए आर्मी ऑपरेशन में आतंकियों कि संख्या कम हुई तो फिर समर्थन वापस क्यों लिया गया? अगर आतंकी घटनाएं सरकार गिरने के बाद कम हुई है तो सरकार को बताना चाहिए की आर्मी अब और अच्छे से अपना काम कर रही है।

देश की राजनीति में पहले कुछ ऐसे विषय होते थे जो राजनीति के परे थे खास कर रक्षा से संबंधित बाते, आर्मी करवाई पर, आर्मी ऑपरेशन पर। लेकिन अब के समय में पार्टियों इन्हीं बातो को लेकर राजनीति कर रही है।

देश के अंग्रेजो से आजाद होने के बाद कितनी लड़ाई लड़ी गई। ये बात किसी को बताने की जरूरत नहीं है क्यों की सबने यह बचपन में हिस्ट्री की किताब में पढ़ी होगी , लेकिन क्या आप ने पहले सुना था कि उस समय की सत्ता पक्ष ने चुनावो में, बड़ी – बड़ी रैलियों में लड़ाई की बाते कर वोट मांगा होगा।

पता नहीं तब तो लोग अनपढ़ होने के बावजूद उस पार्टी को इन मुद्दों पर वोट नहीं देते थे। तो फिर इतने पढ़े लिखे लोगो का आज का समाज इन बातो पर कैसे वोट कर रहा है?

आज के समय में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि, अगर लोग अभी भी नहीं समझे तो 50 साल बाद एक नई पार्टी आकर कहेगी की अंग्रेजो से आजाद करवाने वाली पार्टी ने 60 साल राज करने के बाद इस देश में कुछ नहीं किया और फिर मंदिर, विकास और सबका साथ बात करने वाली पार्टी ने देश को हिन्दू मुस्लिम, सवर्ण दलित में फसा कर 50 साल राज किया ? लेकिन हम इन दोनों के जैसे नहीं है, हम सच में देश का विकास करेंगे?

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