आज पूरे देश में ट्रांसपोर्टर्स की हड़ताल, नहीं चलेंगे 90 लाख ट्रक

नई दिल्ली।

ट्रक और बस ऑपरेटर्स संगठन (AIMTC) आज से अनिश्चिकालीन हड़ताल पर चले गए हैं।शुक्रवार से करीब 90 लाख ट्रक और 50 लाख बस चालक हड़ताल पर हैं। हड़ताल का सीधा असर आम आदमी पर हो रहा है। हड़ताल के चलते दूध-सब्जी और बाकी सामानों की सप्लाई बंद हो गई है।सभी शहरों में बड़े सप्लाई केंद्रों पर बुधवार से ही नई लोडिंग और बुकिंग बंद हो गई थी।

ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि इससे उन्हें लंबी अवधि में नुक्सान ही होगा। प्रस्तावित हड़ताल के बीच सरकार के इस निर्णय को हड़ताल खत्म कराने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है लेकिन ट्रांसपोर्टर इस निर्णय के कारण हड़ताल वापस लेने से इंकार कर रहे हैं। सरकार ने भारी वाहनों के लिए मालवहन क्षमता में भले ही करीब 18 प्रतिशत तक की वृद्धि कर दी है लेकिन वाहन निर्माताओं का कहना है कि वे इस तरह के वाहन का उत्पादन करने के लिए तैयार नहीं हैं।

सूत्रों का कहना है कि सरकार ने ट्रांसपोर्टर्स को मनाने के लिए कुछ रियायतें देने की पेशकश की थी। इसमें लोडिंग सीमा के बढ़ाने के साथ-साथ दो ड्राइवर की अनिवार्यता, फिटनेस सर्टिफिकेट और ओवरलोडिंग पर रियायत जैसी पेशकश की गई थी। बावजूद इसके सहमति न बनने के बाद हड़ताल तय मानी जा रही है। हड़ताल शुरू होती है तो देशभर में करीब 90 लाख ट्रक और 50 लाख बसों के पहिये थम सकते हैं।

बता दें कि अगर यह हड़ताल ज्यादा समय तक चली तो सब्जियों की कीमतें बढ़ सकती हैं, क्‍योंकि ये सबसे अधिक प्रभावित होती हैं। इसी तरह, सब्जियों के बाद सबसे अधिक प्रभावित दूध होने जा रहा है। सब्जियों के बिना लोग दो दिन रह भी सकते हैं, लेकिन दूध उससे अधिक जरूरी चीज है। गेहूं, आटा, चावल, दाल की आवाजाही भी हड़ताल से प्रभावित होने जा रही है।
ये हैं ट्रांसपोर्ट्स की मांगें

-डीजल की कीमतों को जीएसटी के दायरे में लाया जाए या फिर मौजूदा समय में इनपर केन्द्रीय व राज्यों की तरफ से लगने वाले टैक्स को कम किया जाए।

-टोल कलेक्शन सिस्टम को भी बदला जाए क्योंकि टोल प्लाजा पर र्इंधन और समय के नुकसान से सालाना 1.5 लाख करोड़ रुपये का नुकसान होता है।

-थर्ड पार्टी बीमा प्रिमियम पर जीएसटी की छूट मिले और इससे एजेंट्स को मिलने वाले अतिरिक्त कमिशन को भी खत्म किया जाए।

-इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 44AE में प्रिजेंप्टिव इनकम के तहत लगने वाले टीडीएस को बंद किया जाए और र्इ-वे बिल में संशोधन हो।

-ट्रांसपोर्ट मंत्री नितिन गडकरी ने मीडिया से बातचीत में इस बात के संकेत दिए हैं कि दो ड्राइवर्स रखने की अनिवार्यता से राहत दी जा सकती है।

-हर साल छोड़कर इसे एक साल छोड़कर कराने की रियायत दिया जा सकती है।

 

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