क्या है नया कृषि विधेयक? जाने क्यों किसान विरोध कर रहे हैं।

किसान और विपक्षी दलों के जबरदस्त विरोध के बावजूद दो कृषि विधेयक गुरुवार को लोकसभा में पारित हो गए। इससे पहले एक विधेयक मंगलवार को लोकसभा में पारित हुआ था।

इन विधेयकों के विरोध में शिरोमणि अकाली दल से मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने गुरुवार को मंत्री पद से इस्तीफा तक दे दिया। इन विधेयकों को लेकर पहले भी कई किसान संगठन विरोध-प्रदर्शन कर चुके हैं।

भाजपा इन विधेयकों को किसानों के लिए वरदान बता रही है तो कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का कहना है कि इन विधेयकों से किसानों को नुकसान ही होगा। हम आपको बता रहे हैं कि क्या हैं ये विधेयक और क्यों इनका विरोध हो रहा है…

ये हैं वो 3 बिल

  • पहला बिल है : कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) बिल
  • दूसरा बिल है : मूल्य आश्वासन और कृषि सेवाओं पर किसान (संरक्षण एवं सशक्तिकरण बिल)
  • तीसरा बिल है : आवश्यक वस्तु संशोधन बिल

कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने लोकसभा में कहा कि नए विधेयक किसान विरोधी नहीं हैं और ये किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाएंगे। वहीं, विपक्षी दलों ने इन विधेयकों को छोटे किसानों के लिए नुकसानदायक करार देते हुए विधेयकों को संसद की स्थायी समिति के पास भेजने की मांग की थी

किसान क्यों कर रहे हैं विरोध

विरोध करते हुए किसान

किसान यूं तो तीनों अध्यादेशों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन सबसे ज्यादा आपत्ति उन्हें पहले अध्यादेश के प्रावधानों से हैं। उनकी चिंताएं मुख्य रूप से व्यापार क्षेत्र, व्यापारी, विवादों का हल और बाजार शुल्क को लेकर हैं।

किसानों ने आशंका जताई है कि जैसे ही ये विधेयक पारित होंगे, इससे न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) प्रणाली को खत्म करने का रास्ता साफ हो जाएगा और किसानों को बड़े पूंजीपतियों की दया पर छोड़ दिया जाएगा। हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश आदि राज्यों में किसान इन विधेयकों का विरोध कर रहे हैं।

नए विधेयकों में शामिल हैं ये प्रावधान

नए विधेयकों के मुताबिक अब व्यापारी मंडी से बाहर भी किसानों की फसल खरीद सकेंगे। पहले फसल की खरीद केवल मंडी में ही होती थी। केंद्र ने अब दाल, आलू, प्याज, अनाज और खाद्य तेल आदि को आवश्यक वस्तु नियम से बाहर कर इसकी स्टॉक सीमा समाप्त कर दी है।

इसके अलावा केंद्र ने कॉन्ट्रैक्ट फॉर्मिंग (अनुबंध कृषि) को बढ़ावा देने पर भी काम शुरू किया है। किसान संगठनों का आरोप है कि नए कानून से कृषि क्षेत्र भी पूंजीपतियों या कॉरपोरेट घरानों के हाथों में चला जाएगा और इसका नुकसान किसानों को ही होगा।

एमएसपी का क्या होगा?

विपक्षी दलों का तर्क है कि ये विधेयक एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) प्रणाली द्वारा किसानों को प्रदान किए गए सुरक्षा कवच को कमजोर कर देगा और बड़ी कंपनियों द्वारा किसानों के शोषण की स्थिति को जन्म देगा। हालांकि, कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने इन विधेयकों को परिवर्तनकारी बताते हुए कहा कि किसानों के लिए एमएसपी प्रणाली जारी रहेगी।

इन विधेयकों के कारण इस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। तोमर ने कहा कि यह किसानों को बांधने वाला विधेयक नहीं बल्कि किसानों को स्वतंत्रता देने वाला विधेयक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्वीट कर कहा है कि एमएसपी और सरकारी खरीद की व्यवस्था बनी रहेगी।

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